ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रत्न में करिश्माई शक्तियाँ होती है। रत्न अगर सही समय में और ग्रहों की सही स्थिति को देखकर धारण किये जाएं तो इनका सकारात्मक प्रभाव प्राप्त होता है अन्यथा रत्न विपरीत प्रभाव भी देते हैं। ग्रहों के समान रत्नों में भी आपसी विद्वेष होता है अत: किसी रत्न के साथ दूसरे रत्नों को धारण कर सकते हैं यह भी जानना आवश्यक होता है।

सूर्य रत्न माणिक्य

माणिक्य ग्रहों में राजा सूर्य का रत्न होता है। अगर प्रशनकर्ता कुण्डली मे सूर्य किसी भाव में शुभ स्थिति में विराजमान है तो उस भाव की शुभता एवं सूर्य के प्रभाव को बढ़ाने के लिए माणिक्य धारण करना चाहिए। अगर सूर्य शुभ नही हो तो माणिक्य धारण करने से सकारात्मक प्रभाव नहीं मिल पाता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्य अगर तृतीय, छठे अथवा ग्यारहवें भाव में हो तो माणिक्य धारण करना चाहिए। लग्न स्थान में सूर्य की स्थिति होने पर लग्न बलवान बनाने के लिए सूर्य का रत्न पहनना चाहिए। अष्टम भाव में सूर्य की स्थिति होने पर रूबी अर्थात माणिक्य धारण करना पारिवारिक एवं वैवाहिक जीवन के लिए सुखकर होता है। इसी प्रकार सूर्य पंचम अथवा नवम में होने पर भी इस रत्न को पहनने से सकारात्मक प्रभाव प्राप्त होता है।

चन्द्र रत्न मोती

ग्रहों में रानी चन्द्रमा का रत्न मोती है। ज्योतिषीय विधा के अनुसार कुण्डली में चन्द्रमा शुभ भावों में बैठा हो तभी मोती पहनना चाहिए इससे चन्द्रमा उत्तम फल देता है। मोती धारण करने के संदर्भ में ज्योतिषशास्त्र कहता है कि अगर कुण्डली में चन्द्रमा द्वितीय भाव का स्वामी हो तो इस रत्न को धारण करना चाहिए। इसी प्रकार पंचमेश होकर द्वादश भाव में स्थित हो तो मोती पहनना चाहिए। वृश्चिक राशि वालों की कुण्डली में चन्द्रमा किसी भी भाव में हो मोती धारण करना लाभप्रद होता है। जिस व्यक्ति की कुण्डली में चन्द्रमा पर पाप ग्रह राहु केतु अथवा मंगल की दृष्टि हो उनके लिए मोती बहुत ही लाभप्रद होता है। चन्द्रमा की अन्तर्दशा में चन्द्र रत्न मोती धारण करना शुभ होता है।

मंगल रत्न मूंगा

ग्रहों के सेनापति मंगल का रत्न मूंगा है। इस रत्न को तब धारण करना चाहिए जबकि कुण्डली में मंगल शुभ भाव का स्वामी हो कर स्थित हो। इस स्थिति में मंगल की शुभता में वृद्धि होती है और व्यक्ति को लाभ मिलता है। अगर मंगल कुण्डली में अस्त अथवा पीड़ित हो तब भी मूंगा धारण करना शुभ होता है। मंगल की इस दशा मे मूंगा धारण करने से इसके अशुभ प्रभाव में कमी आती है।

बुध का रत्न पन्ना

ग्रहों में राजकुमार बुध का रंग हरा है और इनके रत्न का रंग भी हरा है। बुध का रत्न है पन्ना, बुध बुद्धि का स्वामी है। इस ग्रह का रत्न तब धारण करना चाहिए जब कुण्डली में बुध शुभ भाव का स्वामी हो। अगर बुध अशुभ स्थिति में हो तो इसका रत्न धारण करने से इसके अशुभ प्रभाव में और वृद्धि होती है।
ध्यान रखने योग्य तथ्य यह है कि, रत्न उस समय धारण करना विशेष लाभप्रद होता है जब सम्बन्धित ग्रह की दशा चल रही होती है।

पुखराज रत्न

वैदिक ज्योतिष के अनुसार पुखराज, ब्रहस्पति गृह का प्रतिनिधित्व करता है! यह पीले रंग का एक बहुत मूल्यवान रत्न है, जितना यह मूल्यवान है उतनी ही इस रत्न की कार्य क्षमता प्रचलित है! इस रत्न को धारण करने से ईश्वरीय कृपया प्राप्त होती है! मेरे व्यक्तिगत अनुभव में, पुखराज धारण करने से विशेषकर आर्थिक परेशानिया खत्म हो जाती है, और धारण करता को अलग अलग रास्तो से आर्थिक लाभ मिलना प्रारम्भ हो जाता है, इसलिए मेरा यह मानना है की आर्थिक समस्याओ से निजाद प्राप्त करने और जीवन में तरक्की प्राप्त करने के लिए जातक को अवश्य अपनी कुंडली का निरक्षण करवाकर पुखराज धारण करना चाहिए! पुखराज धारण करने से अच्छा स्वास्थ्य, आर्थिक लाभ, लम्बी उम्र और मान प्रतिष्ठा प्राप्त होती है! जिन कन्याओ के विवाह में विलम्भ हो रहा हो उन्हें पुखराज अवश्य धारण करना चाहिए, मेरे अनुभव से पुखराज धारण करने से कन्याओ का विवाह अच्छे घर में होता है! जिन दम्पत्तियो को पुत्र की लालसा हो उन्हें भी पुखराज अवश्य धारण करना चाहिए क्योकि ब्रहस्पति पति और पुत्र दोनों कारक होता है, लेकिन में फिर से दोहरा रहा हूँ की किसी भी रत्न को धारण करने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी की सलाह अवश्य कर लें!

लाल किताब के अनुसार

रत्नों में ग्रहों की उर्जा को अवशोषित करने की अद्भुत क्षमता होती है। रत्नों में विराजमान अलौकि गुणों के कारण रत्नों को ग्रहों का अंश भी माना जाता है। ज्योतिषशास्त्र की सभी शाखाओं में रत्नों के महत्व का वर्णन मिलता है। लाल किताब भी इससे मुक्त नहीं है। इसमें मंदे, कमज़ोर एवं सोये हुए ग्रहों को नेक, बलशाली, एवं जगाने के लिए रत्न धारण करने की सलाह दी गई है।

ग्रह रत्न और धातु

ग्रह रत्न धारण करने का विशेष नियम है। लाल किताब कहता है जिस ग्रह का रत्न धारण करना हो उस ग्रह से सम्बन्धित धातु की अंगूठी में रत्न धारण करना चाहिए। इस संदर्भ में यह मान्यता है कि धातु और रत्न समान ग्रह से सम्बन्धित हैं तो परिणाम विशेष अनुकूल होता है। अगर कुण्डली में सूर्य को जगाना हो बलशाली बनाना हो तो सोने की अंगूठी में माणिक्य धारण करना चाहिए। सोना सूर्य का धातु है और माणिक्य उसका रत्न अत: दोनों मिलकर परिणाम अनुकूल बनाते हैं। इसी प्रकार सभी ग्रहों का अपना रत्न और धातु है। ग्रहों के मंदे फल से बचने के लिए जब भी अंगूठी बना रहे हों इस बात का ख्याल रखना चाहिए।
चन्द्रमा का रत्न है मोती और धातु है चांदी। मंगल का रत्न है मूंगा और धातु है तांबा। बुध का रत्न है पन्ना और धातु है सोना इसी प्रकार से गुरू का रत्न पुखराज है और धातु है सोना। शुक्र का रत्न है हीरा और धातु है चांदी। शनि का रत्न नीलम और धातु है लोहा। राहु का प्रिय रत्न है गोमेद और धातु है अष्टधातु। केतु का रत्न है लहसुनियां जिसे सोना अथवा तांबा किसी भी अंगूठी में धारण किया जा सकता है। केतु के नेक फल के लिए लहसुनिया के बदले दो रंगा पत्थर भी धारण किया जा सकता है।

सावधानियाँ

रत्न शुभ फल देने की शक्ति रखता है तो अशुभ फल देने की भी इसमें ताकत है। रत्नों के नाकारात्मक फल का सामना नहीं करना पड़े इसके लिए रत्नों को धारण करने से पहले कुछ सावधानियों का भी ध्यान रखना जरूरी होता है। लाल किताब के नियमानुसार परस्पर मुकाबले वाले ग्रहों का रत्न धारण नहीं करना चाहिए।
जिन दो ग्रहों के बीच मुकाबला हो उनमें एक ग्रह का रत्न ही धारण करना चाहिए अन्यथा शुभ परिणाम की जगह अशुभ परिणाम प्राप्त होने लगता है। जो ग्रह कुण्डली में धर्मी हो उस ग्रह का रत्न धारण किया जा सकता है लेकिन अगर कोई ग्रह धर्मी ग्रह के मुकाबले का ग्रह हो तो मुकाबले के ग्रह का रत्न धर्मी ग्रह के रत्न के साथ नहीं धारण करना चाहिए। अगर जन्मदिन और जन्म समय का ग्रह एक हो तो उस ग्रह का रत्न जरूर पहनना चाहिए यह हमेशा लाभ देता है।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार हीरा रत्न, शुक्र गृह का प्रतिनिधित्व करता है

वैदिक ज्योतिष के अनुसार हीरा रत्न, शुक्र गृह का प्रतिनिधित्व करता है ! यह एक अत्यंत प्रभावशाली रत्न होता है और इसका बहुत छोटा आकार भी बाज़ार में काफी कीमत रखता है ! ज्यदातर हीरा स्त्री वर्ग का पसंदीदा रत्न है ! और हो भी क्यों न, ज्योतिष के अनुसार शुक्र को भी सुन्दरता और स्त्री वर्ग के साथ जोड़ा गया है ! इसीलिए सीधे तोर पर हीरे का गहरा सम्बन्ध स्त्री वर्ग से स्थापित होता है ! शुक्र गृह सुन्दरता, वैभव और एश्वर्य तथा भोग विलास का गृह है ! सुखी ववाहिक जीवन के लिए भी शुक्र गृह का शुभ स्थिति में होना आवश्यक है ! और हीरे का सम्बन्ध सीधे तोर पर शुक्र से होने पर इन सभी प्रकार के सुख और वैभव की प्राप्ति हीरा धारण करने से होती है ! क्योकि हीरा धारण करने से हम शुक्र को बलि करते है है, फल स्वरूप शुक्र हमें उससे जड़े सभी वैभव और सुख प्रदान करता है ! विवाह सुख की प्राप्ति के लिए हीरा अवश्य धारण करना चाहिए क्योकि इसके धारण करने से वर वधु के बिच मधुर सम्बन्ध स्थापित होता है और वे आजीवन ववाहिक जीवन का सुख प्राप्त करते है ! स्त्री वर्ग से जुड़े व्यापारियों के लिए भी हीरा शुभ फलदायक होता है जैसे आभूषण, कपडे, साज सज्जा का सामान आदि ! फ़िल्मी क्षेत्र अथवा टेलीविजन क्षेत्र से जुड़े लोगो को भी हीरा अवश्य धारण करना चाहिए क्योकि इन व्यवसायों में शुक्र गृह की बहुत बड़ी भूमिका होती है ! शुक्र की शुभता को प्राप्त किये बिना फ़िल्मी क्षेत्र, टेलीविजन क्षेत्र और मोडलिंग में सफलता प्राप्त करना नामुमकिन है ! जिन जातको की कुंडली में शुक्र गृह शुभ स्थिति में तथा शुभ प्रभाव दे रहा हो उन्हें हीरा अवश्य धारण करना चाहिए और यदि शुक्र की स्थिति ठीक न हो और शुक्र से जुड़े क्षेत्रों में परेशानिया उत्त्पन्न हो रही हो तो शुक्र के उपायों द्वारा अपनी परेशानियों का हल करें ! शुक्र रत्न हीरा धारण करने से पहले अनुभवी ज्योतिष की सलाह अवश्य लें अन्यथा अशुभ होने की स्थिति में यह फायदा देने की बजाय नुक्सान दे सकता है !

लहसुनिया

लहसुनिया लहसुनिया को केतु रत्न माना गया है। इसके विविध नाम इस प्रकार हैं- लहसुनिया, वैदूर्य, विडालाक्ष, केतु रत्न, सूत्र मणि तथा अंग्रेजी में इसे कैट्स आई कहते हैं। लहसुनिया हल्के पीले रंग का तथा बांस के समान होता है। इसकी सतह पर सफेद रंग का सूत्र अथवा धारी होती है, जो कि हिलाने-डुलाने पर चलती हुई-सी प्रतीत होती है। इस प्रकार देखने से यह बिल्ली की आंख के समान प्रतीत होता है। इसी कारण इसे विडालाक्ष अथवा कैट्स आई भी कहा जाता है। यह वायु-गोला तथा पिŸाज रोगों का नाशक, सरकारी कार्यों में सफलता दिलाने वाला तथा दुर्घटना आदि से बचाने वाला होता है। लहसुनिया का जन्म: लहसुनिया अधिकतर पैग्माइट, नाइस तथा अभ्रकमय परतदार शिलाओं में पाया जाता है। यह नालों की तलहटी में भी पाया जाता है। रासायनिक दृष्टि से यह बैरीलियम का एल्युमीनेट होता है। यह हल्का पीलापन मिश्रित हरा रंग फैरस आॅक्साइट के कारण होता है। लहसुनिया श्रीलंका, ब्राजील, चीन तथा बर्मा में प्राप्त होता है। भारत में यह उड़ीसा में पाया जाता है। श्रीलंका का लहसुनिया प्रसिद्ध है। विशेषता व धारण करने से लाभ ः लहसुनिया धारण करने से दुःख दरिद्रता, व्याधि, भूत बाधा एवं नेत्र रोग नष्ट होते हैं। लहसुनिया की प्रमुख विशेषता यह है कि इसे धारण करने से केतु जनित समस्त दुष्प्रभाव शांत होते हैं। लहसुनिया की पहचान: असली लहसुनिया की पहचान निम्नलिखित हैं- अच्छे लहसुनिया में चमकीलापन तथा चिकनाहट होती है। वजन में यह सामान्य से कुछ वजनदार प्रतीत होता है। लहसुनिया के बीच में सफेद रंग का सूत्र अथवा धारी होती है। इसे थोड़ा इधर-उधर घुमाने पर यह धारी चलती हुई-सी प्रतीत होती है। इसे कपड़े पर रगड़ने से इसकी चमक में वृद्धि होती है। लहसुनिया धारण विधि: लहसुनिया की अंगूठी सोने या चांदी में बनवाकर सोमवार के दिन कच्चे दूध व गंगाजल से धोकर अनामिका उंगली में निम्नलिखित मंत्र के उच्चारण के साथ धारण करनी चाहिए-

गोमेद

गोमेद विवरण

गोमेद एक रत्न है जिसे राहु ग्रह से समबन्धित किसी भी विषय के लिए धारण करने हेतु ज्योतिषशास्त्री परामर्श देते हैं. गोमेद न सिर्फ राहु ग्रह की बाधाओं को दूर करता है बल्कि, गोमेद कई प्रकार की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से भी निजात दिलाता है . गोमेद एक ऐसा रत्न है जो नज़र की बाधाओं, भूत-प्रेत एवं जादू-टोने से भी सुरक्षा प्रदान करता है |

गोमेद किसे धारण करण चाहिए

कुण्डली में राहु जिस भाव में हो उस भाव के शुभ फल को बढ़ाने के लिए राहु रत्न गोमेद पहनना चाहिए |ज्योतिषशास्त्र के अनुसार राहु तीसरे, छठे भाव में हो तो गोमेद पहनना चाहिए. मेष लग्न की कुण्डली में यदि राहु नवें घर में है तो गोमेद पहनने से भाग्य बलवान होता है.
राहु यदि दशम अथवा एकादश भाव में है तब भी गोमेद धारण करना उत्तम होता है. लग्न में राहु होने पर स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियों को कम करने हेतु गोमद पहनना फायदेमंद होता है.
राजनीति एवं न्याय विभाग से जुड़े लोगों की कुण्डली में राहु मजबूत होने पर सफलता तेजी से मिलती है. राहु को बलवान बनाने के लिए इन्हें गोमेद रत्न धारण करना चाहिए.

गोमेद से लाभ

गोमेद पहनने से राहु का अशुभ प्रभाव दूर होता है. कालसर्प दोष के कष्टों से भी बचाव होता है. जिन लोगों की सेहत अक्सर खराब रहती है उन्हें भी गोमेद पहनने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है.
पाचन सम्बन्धी रोग, त्वचा रोग, क्षय रोग तथा कफ-पित्त को भी यह संतुलित रखता है. आयुर्वेद के अनुसार गोमेद के भस्म का सेवन करने से बल एवं बुद्धि बढ़ती है. पेट की खराबी में गोमद का भस्म काफी फायदेमंद होता है. राहु तीव्र फल देने वाला ग्रह है.
गोमेद पहनने से राहु से मिलने वाले शुभ फलों में तेजी आती है. व्यक्ति को मान-सम्मान एवं धन आदि प्राप्त होता है

नीलम

नीलम विवरण

नीलम नीले रंग का बहुत ही मुलायम और खूबसूरत रत्न है. यह सभी रत्नों में सबसे खास महत्व रखता है.श्रीशनि देव का यह रत्न नीलम, संसार में सबसे श्रेष्ठ और चमत्कारिक रत्नों में माना गया है. इसे पहनने के बाद, यह जिसके लिए शुभ हो जाए उसे राजा और जिसे अशुभ हो जाए उसे रंक भी बना देता है.
नीलम नीला, लाल (सुर्ख लाल) सफ़ेद हरा, बैंगनी आसमानी पीला आदि रंगों में पाया जाता है. (पीला नीलम वृहस्पति से सम्बंधित है) कश्मीर में पाये जाने वाले नीलम को मयूर नीलम कहा जाता है. मोर की गर्दन जैसे रंग वाला यह नीलम उत्तम श्रेणी का माना जाता है। भारत के अलावा यह चीन अमेरिका थाईलैंड़, जावा, आस्ट्रेलिया, श्रीलंका और काबुल के पास भी पाया जाता है. कटैला, काला हकीक, काला स्टार, मार्का इसके उपरत्न होते हैं.

श्रेष्ठ नीलम के गुण

नीलम बहुत अधिक चिकना, चमकीला, साफ़ व पारदर्शी होता है. इसमे से छोटी – छोटी किरणें निकलती दिखाई देती हैं. यदि कोई तिनका असली नीलम के सम्पर्क में आता है तो तिनका उससे चिपट जाता है. असली नीलम में सीधी धारियाँ होती हैं.
गाय के दूध में सच्चा नीलम ड़ाल दिया जाए तो दूध का रंग नीला हो जाता है.
काँच के गिलास में पानी भरकर उसमें नीलम ड़ाल दिया जाए, तो पानी से नीले रंग की किरणें स्पष्ट निकलती हुई दिखाई देती है.
नीलम को यदि धूप में रखा जाए तो इससे नीले रंग की तीव्र किरणें स्पष्ट निकलती हुई दिखाई देती हैं.
नीलम एक ऐसा चमत्कारिक रत्न माना जाता है जिसके बारे में कहा जाता है कि बिच्छु के ड़ंक पर नीलम रत्न के असर वाला पानी ड़ालने से जहर का प्रभाव कम होता रहता है.