1. यह उपाय सोमवती अमावष्या को करनी है,किसी भी पीपल के पेड़ में जाकर एक जनेऊ पीपल वृक्ष को अर्पित करें एवं एक जनेऊ श्री भगवान विष्णु का स्मरण करके उसी स्थान पर अर्पित करें, और कुछ समय वही पर बैठकर भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए प्रार्थना करें कि उनके जो भी पित्र हो उन्हे मुक्ति प्रदान कर मेरे जीवन में सुख , समृद्वि और स्वास्थ्य प्रदान करें और ‘‘ऊॅ नमों भगवते वासुदेवाय’’ इस मंत्र का जप करते हुए 108 परिक्रमा पीपल वृक्ष का लगाए प्रत्येक परिक्रमा में कोई भी मीठा लेकर अर्पित करते जाए, और अंत में पुनः भगवान विष्णु से क्षमा मांगे, प्रार्थना करे कि मुझसे या मेरे पितरो से जाने अन्जाने जो भी मूल हुई हो उसके लिए मैं मांगता हॅू, क्षमा करें।
2. चावन का आटा चालव घी से छोटे-छोटे लड्डू बना ले और प्रत्येक शनिवार को कौओ, मछलियों को खिलाए लगातार 21 शनिवार।
3. माता काली की साधना करें।
4. प्रत्येक अमावष्या को किसी सुपात्र ब्राम्हण को भोजन कराने एवं यथा शक्ति वस्त्र एवं दक्षिणा देने से पित्र दोष का प्रभाव जातक के जीवन में कम होता है।
5. प्रत्येक अमावस्या को दक्षिण की ओर मुखकर कण्डे की आग में पित्रों का आवाहन कर हवन करने से पित्र दोष का प्रभाव जातक के जीवन में कम होता है।
6. पिता का सम्मान करने या जो लोग पिता समान है उनके चरण छूकर आर्षीवाद लेंने से सूर्य मजबूत होता है, जिससे पित्र दोष का प्रभाव जातक के जीवन में कम होता है।
7. सूर्योदय के समय स्थान करने के पश्चात् किसी आसन पर खड़े होकर सूर्यदेव को प्रणाम करें, और उनके अपनी शक्ति एवं आर्षीवाद प्रदान करने के लिए प्रार्थना करें, फिर कम से कम 5 माला रूद्राक्ष की माला से गायत्री मंत्र का जाप करें इस क्रिया से भी सूर्य की कृपा प्राप्त होती है।
8. सूर्य को प्रबल बनाने के लिए शुभफल की प्राप्ति के लिए सूर्यरत्न माणिक भी धारण किया जाता है। पर जन्म कुण्डली के अनुसार।
9. सूर्य मंत्र का जाप सवा लाख करने या कराने से एवं राहू शांति का उपाय करने से पित्र दोष से शांति मिलती है।