Nagpanchami and Indian Culture: नाग और हमारी संस्कृति

नाग हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा है. जहां एक तरफ नागभगवान शंकर के आभूषण के रूप में उनके गले में लिपटे रहते हैं तो वहीं शिवजी का निर्गुण-निराकार रूप शिवलिंग भी सर्पों के साथ ही सजता है. भगवान विष्णु शेषनाग की शय्या पर ही शयन करते हैं. शेषनाग विष्णुजी की सेवा से कभी विमुख नहीं होते. मान्यता है कि जब-जब भगवान विष्णु पृथ्वी पर अवतार लेते हैं, तब-तबशेषनाग जी उनके साथ अवतरित होते है. रामावतार में लक्ष्मणजी तथा कृष्णावतार में बलराम जी के रूप में शेषनाग ने भी अवतार लिया था.

Nag Panchami : नागपंचमी कब मनाते हैं

पवित्र श्रावण (सावन) माह के शुक्ल पक्ष में पांचवें दिन को या पंचमी को नागपंचमी के रूप में मनाया जाता है. मान्यता है कि श्रावण मास के शुक्लपक्ष की पंचमी नागों को आनंद देने वाली तिथि है, इसलिए इसे नागपंचमी के नाम से प्रसिद्धि प्राप्त है. पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार मातृ-शाप से नागलोक जलने लगा, तब नागों की दाह-पीड़ा श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन ही शांत हुई थी. इस कारण नागपंचमी पर्व लोकविख्यात हो गया.

 

नाग गायत्री मंत्र

ओम नवकुलाए विदमाह् विषदन्ताय् धीमही तनो सर्पः प्रचोदयात