चन्द्रमा शुभ ग्रह है.यह शीतल और सौम्य प्रकृति धारण करता है.ज्योतिषशास्त्र में इसे स्त्री ग्रह के रूप में स्थान दिया गया है.यह वनस्पति, यज्ञ एवं व्रत का स्वामी ग्रह है.

लाल किताब में सूर्य के समान चन्द्रमा को भी प्रभावशाली और महत्वपूर्ण माना गया है (Moon is considered as important as Sun in Lal Kitab) . टेवे में अपनी स्थिति एवं युति एवं ग्रहों की दृष्टि के अनुसार यह शुभ और मंदा फल देता है.

लाल किताब में खाना नम्बर चार को चन्द्रमा का घर कहा गया है (The fourth house is considered the house of Moon in Lal Kitab).चन्द्रमा सूर्य और बुध के साथ मित्रपूर्ण सम्बन्ध रखता है.मंगल, गुरू, शुक्र, शनि एवं राहु के साथ चन्द्रमा शत्रुता रखता है.केतु के साथ यह समभाव रखता है.मिथुन और कर्क राशि में यह उच्च होता है एवं वृश्चिक में नीच.सोमवार चन्द्रमा का दिन होता है.लाल किताब के टेवे में 1, 2, 3, 4, 5, 7 एवं 9 नम्बर खाने में चन्द्रमा श्रेष्ठ (Moon is exalted) होता है जबकि 6,7, 10, 11 एवं 12 नम्बर खाने में मंदा होता है.

उच्च राशि के साथ सप्तम खाने में चन्द्रमा होने से धन एवं जीवन के सम्बन्ध में उत्तम फल मिलता है.कुण्डली में चतुर्थ भाव यानी चन्द्र का पक्का घर अगर खाली हो और इस पर उच्च ग्रहों की दृष्टि भी न हो और अन्य ग्रह अशुभ स्थिति में हों तब भी चन्द्रमा व्यक्ति को अशुभ स्थितियों से बचाता और शुभता प्रदान करता है.

लाल किताब के सिद्धान्त के अनुसार जब चन्द्रमा पर शुक्र, बुध, शनि, राहु केतु की दृष्टि होती है तो मंदा फल होता है (When Venus, Mercury, Saturn, Rahu or Ketu aspects Moon then it is debilitated) जबकि इसके विपरीत चन्द्र की दृष्टि इन ग्रहों पर होने से ग्रहों के मंदे फल में कमी आती है और शुभ फल मिलता है.चन्द्र के घर का स्थायी ग्रह शत्रु होने पर भी मंदा फल नहीं देता है.ज्योतिष की इस विधा में कहा गया है कि चन्द्रमा अगर टेवे में किसी शत्रु ग्रह के साथ हो तब दोनों नीच के हो जाते हैं जिससे चन्द्रमा का शुभ फल नहीं मिलता है.लाल किताब में खाना नम्बर 1, 4, 7 और 10 को बंद मुट्ठी का घर कहा गया है.इन घरो में स्थित ग्रह अपनी दशा में व्यक्ति को अपनी वस्तुओं से सम्बन्धित लाभ प्रदान करते हैं.

शरीर का बायां अंग, बायीं आंख, स्त्रियों में मासिक धर्म, रक्त संचार इन पर चन्द्र का प्रभाव रहता है.मन, दया की भावना, आकांक्षाएं चन्द्रमा द्वारा संचालित होते हैं.जिनके टेवे में चन्द्रमा मंदा या कमज़ोर होता है उनमें दया की भावना का अभाव होता है (If Moon is weak, a person may lack empathy).ये दूसरों की उन्नति देखकर उदास होते हैं.मन में अहंकार की भावना रहती है.इनकी माता को एवं स्वयं को कष्ट उठाना पड़ता है.पैतृक सम्पत्ति को संभालकर नहीं रख पाता है.जिस स्त्री के टेवे में चन्द्रमा कमज़ोर होता है उन्हें मासिक चक्र में परेशानी होती है