घर भी रोटी और कपडा की तरह से जरूरी है,मनुष्य अपने लिये रहने और व्यापार आदि के लिये घर बनाता है,पक्षी अपने लिये प्रकृति से अपनी बुद्धि के अनुसार घोंसला बनाते है,जानवर अपने निवास के लिये गुफ़ा और मांद का निर्माण करते है। जलचर अपने लिये जल में हवा मे रहने वाले वृक्ष आदि पर और जमीनी जीव अपने अपने अनुसार जमीन पर अपना निवास करते है। अपने अपने घर बनाने के लिये योग बनते है। गुरु का योग घर बनाने वाले कारकों से होता है तो रहने के लिये घर बनता है शनि का योग जब घर बनाने वाले कारकों से होता है तो कार्य करने के लिये घर बनने का योग होता है जिसे व्यवसायिक स्थान भी कहा जाता है। बुध किराये के लिये बनाये जाने वाले घरों के लिये अपनी सूची बनाता है तो मंगल कारखाने और डाक्टरी स्थान आदि बनाने के लिये अपनी अपनी तरह से बल देता है। लेकिन घर बनाने के लिये मुख्य कारक शुक्र का अपना बल देना भी मुख्य है,अलग अलग राशियों के लोगों को अपने अपने समय में घर बनाने के योग बनते है।

मेष राशि वालों के लिये गुरु जब भी कर्क राशि का वृश्चिक राशि का या मीन राशि का होगा तभी उनके लिये घर बनाने के लिये योग बन जाते है। लेकिन गुरु जब कर्क राशि का होता है तो अपने द्वारा अर्जित आय से घर बनता है,गुरु जब वृश्चिक राशि का होता है तो दूसरे के बनाये गये घर या मृत्यु के बाद की सम्पत्ति पर अपना निवास बनाये जाने या किसी बेकार की पडी सम्पत्ति पर अपना अधिकार जमाकर घर बनाने वाली बात सामने आती है। मंगल के अनुसार घर बनाने की स्थिति भी अपने अपने समय पर बनती है। इस राशि वालों के लिये घर बनाना और घर छोडना बारह साल में तीन बार देखने को मिलता है। जब गुरु कर्क राशि का होता है तो यह घर के अन्दर ही नये प्रकार का निर्माण करते है,वृश्चिक राशि का होता है तो पुराने निर्माण को तुडवाकर अपना निर्माण करते है और जब मीन राशि का होता है तो सामाजिक या किसी अन्य प्रकार से बेदखल जमीन पर अपना निर्माण करते है। गुरु के साथ बुध की युति होती है तो कर्जा लेकर या घर के सामने वाले पोर्सन को सही किया जाता है,अथवा कोई दुश्मनी वाली जमीन पर कब्जा किया जाता है,शनि की साथ वाली स्थिति और केतु के सहयोग से जो घर बनता है वह वकीलो और कब्जा लेने वाली बातों से घर बनता है। सबसे अधिक खतरनाक स्थिति तब बनती है जब राहु किसी तरह से घर बनाने वाले कारकों पर अपना असर देता है।

वृष राशि वालों के लिये भी गुरु जब सिंह राशि का हो धनु राशि का हो या मेष राशि का हो तभी घर बनाने वाली बाते सामने आती है। सिंह राशि के गुरु के सानिध्य में घर बनता है लेकिन घर के अन्दर कई तरह की राजनीति बन जाती है,लेकिन घर बनता जरूर है और धनु राशि में बनाये जाने वाले घर के अन्दर या किसी प्रकार के बंटवारे को लेकर पुरानी सम्पत्ति को लेकर या बाप दादा की सम्पत्ति के बारे मे फ़ैसला लेकर घर बनवाया जाता है,लेकिन मेष राशि में गुरु के होने पर बनवाये जाने वाले घर में दिक्कत ही पैदा होती है। इस राशि वालों के लिये अक्सर घर और जमीनी कारणों में अदालती कारण भी सामने आते है और उन कारणों से वे अपने घर में चैन से नही रह पाते है। मिथुन और मेष राशि का दखल होने से भी घर के अन्दर की सभी बाते गुप्त नही रह पाती है और उस घर को एक धर्मशाला के रूप में भी माना जाये तो अन्यथा नही है। इस राशि के घर बनाने के बाद अक्सर दाहिनी तरफ़ वाला पडौसी अपने घर में रहने वाली व्यापारिक क्रिया को ही रखता है और वृष राशि वालों से किसी न किसी प्रकार का पंगा लेने के लिये ही तैयार रहता है जबकि बायीं ओर का पडौसी शांत भी होता है और घर की बातों को भी धीरे धीरे अपने उपक्रमो से सुनकर समझ कर और दूसरों के अन्दर अफ़वाह फ़ैलाकर बदनाम करने की कोशिश करता है।